Tuesday, 19 September 2017

शायरी collection 1

चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे दर पे
नहीं आए , तुम झुकते नहीं, और मै
चौखटें ऊंची कर नही पाता …



न करवटे थी न बेचैनियाँ थी,,
क्या गजब की नीँद थी मोहब्बत से पहले…



सबब तलाश करो…..अपने हार जाने का,,

किसी की जीत पर रोने से कुछ नहीं होगा..



खुद को खुद की खबर न लगे
कोई अच्छा भी इस कदर न लगे….

आपको देखा है उस नजर से
जिस नजर से आपको नजर न लगे ..




छुपा लूंगा तुझे इस तरह से मेरी बाहों में;
हवा भी गुज़रने के लिए इज़ाज़त मांगे;
हो जाऊं तेरे इश्क़ में मदहोश इस तरह;
कि होश भी वापस आने के इज़ाज़त मांगे।



पूछते थे ना कितना प्यार है हमें तुम से

लो अब गिन लो… ये बूँदें बारिश की…



रोक कर बैठे हैं कई समंदर आँखों में
दगाबाज़ हो सावन तो क्या…
हम खुद ही बरस लेंगे…



तम्मन्ना है की कोई हमारी सख्शियत से भी प्यार करे।

वरना हैसियत से प्यार तो तवायफ़े भी करती हैं।



दिल है कदमों पे किसी के सर झुका हो या न हो,
बंदगी तो अपनी फ़ितरत है, ख़ुदा हो या न हो।



यूँ तो सिखाने को ज़िन्दगी बहुत कुछ सिखाती है…!!

मगर ,,
झूठी हंसी हँसने का हुनर तो बस मोहब्बत ही सिखाती है…!!

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