मेरे हर ख़्वाब को पूरा करने का ख़्वाब देखते हैं पिताजी…
कुछ सपने उनके अधूरे रह गए होंगे शायद
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इतना कीमती न कर तू खुद को,अक्सर लोग मँहगी चीजों को देखकर छोड़ देते हैं!
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सुखे पेड़ों पर परिन्दे भी नहीं आते,,
मुफ़लिसी हो तो मेहमान भी घर नहीं आते..
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तु मिल गई है ताे मुझ पे नाराज है खुदा..
कहता है की तु अब कुछ माँगता नहीं है..!!
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जो फ़किरी मिजाज रखते हे वो ठोकरो मे भी ताज रखते हे ,
जीनको कल की फ़िकर नही वो मुठ्ठी मे भी आज रखते है ॥
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मेरी दोस्ती का फायदा उठा लेना, क्युंकी…
मेरी दुश्मनी का नुकसान सह नही पाओगे…!
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लौट आता हूँ वापस घर की तरफ…
हर रोज़ थका-हारा, आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।
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हँस कर दर्द छुपाने की कारीगरी मशहूर है मेरी,,,
पर कोई हुनर काम नहीं आता ,जब तेरा नाम आता हैं…!!
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ये खामोश मिजाजी तुम्हें जीने नहीं देगी ,,,
इस दुनिया में जीना है तो कोहराम मचा दो।।
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मुझे इतना नीचे भी मत गिराना हे ईश्वर! कि मैं पुकारूँ और तू सुन ना पाये;
और इतना ऊँचा भी मत उठाना कि तू पुकारे और मैं सुन ना पाऊं।
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तु भी समज जाओगे अंजामे मौहब्बत ऐ दोस्त,
मौत किस्तो मे जब आती है तो बहुत ददॅ होता है…
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मैं तेरे नसीब कि बारिश नहीं जो तुजपे बरस जाऊं!
तुजे तक़दीर बदलनी होगी मुझे पाने के लिए!
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जंगल मे जब शेर चैन की निन्द सोता है,
तो कुतो को गलतफहमी हो जाती है
के इस जंगल मे अपना राज है…
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